
कर्नाटक के पिछले तीन विधानसभा चुनावों का विश्लेषण बताता है कि राज्य की लिंगायत और एससी-एसटी वोटरों के असर वाली सीटों पर जो पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है, राज्य में उसकी सरकार बन जाती है। प्रदेश में 70 सीटों पर लिंगायत और 80 सीटों पर एससी-एसटी वोटरों का असर है। इस बार भी इन तीनों समुदाय के वोट जिसके पक्ष में जाएंगे, उसी दल के सरकार बनाने की संभावना सबसे ज्यादा होगी।
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